जयपुर, राजस्थान पल्स न्यूज़
जब से विधानसभा का बजट सत्र शुरू हुआ है तभी से कांग्रेस भजनलाल सरकार को जमकर घेर रही है। इस दौरान कई बार तो हंगामा इतना बढ़ गया कि विधानसभा में कार्रवाई को स्थगित किया गया। 3 जुलाई से शुरू हुए विधानसभा सत्र में कई बार ऐसा मौका भी देखने को मिला है जिसमें भाजपा के विधायक ही अपनी सरकार को घेरते नजर आए। ऐसे में अब सरकार को कांग्रेस के साथ अपने ही विधायको से खतरा होने लगा है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार भाजपा के कुछ विधायकों ने विधानसभा में अपनी ही सरकार को घेरने का काम किया है। ऐसे में इन विधायकों की भूमिका विपक्ष के रूप में सामने आई है। इसको लेकर सियासत में हलचल मची हुई है। जयपुर के सिविल लाइन विधानसभा क्षेत्र के विधायक गोपाल शर्मा, विधायक श्रीचंद्र कृपलानी, प्रतापसिंह सिंघवी, कालीचरण सराफ और केसाराम चौधरी ऐसे विधायक हैं जो भाजपा पार्टी के टिकट पर जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे हैं। लेकिन इस बजट सत्र में इन विधायकों की भूमिका विपक्षी दल के विधायकों जैसी ही दिखाई दी है। पिछले दिनों में इन विधायकों ने अलग-अलग समय चर्चा के दौरान अपनी ही पार्टी की सरकार को घेरने का काम किया है। सिविल लाइन विधायक गोपाल शर्मा ने तो सदन में अपने आक्रामक तेवर दिखाते हुए भजनलाल सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। वहीं श्रीचंद्र कृपलानी, प्रतापसिंह सिंघवी और कालीचरण सराफ तो भाजपा के वरिष्ठ नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। इन तीनों विधायकों ने भी अपनी ही सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
इन विधायकों के अलावा भी भाजपा के कई विधायक ऐसे हैं जिन्होंने सदन से बाहर भी भजनलाल सरकार को घेरा है। ब्यावर विधानसभा क्षेत्र के विधायक शंकरसिंह रावत ने ब्यूरोक्रेसी को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। विधायक रावत ने कहा था कि सरकार में ब्यूरोक्रेसी हावी है। जनप्रतिनिधियों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उनके इन बयानों के बाद सियासी गलियारों में जमकर हलचल मच गई थी। इसी तरह बैर विधायक बहादुरसिंह कोली ने भी पिछले दिनों भजनलाल सरकार की योजनाओं को लेकर जमकर हमला किया था। उन्होंने कन्यादान योजना को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि इस योजना में अधिकारी जमकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं, उनको कन्यादान दिए बगैर लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।
भाजपा विधायकों की ओर से अपनी ही सरकार को घेरे जाने पर राजनीतिक विश्लेषकों ने भी अपने-अपने मायने निकालने शुरू कर दिए। कई लोगों का मानना है कि भाजपा प्रदेश में कई गुटों में बंट गई हैं। उत्तरप्रदेश की तरह से यहां भी पार्टी के कई नेता और पदाधिकारी नेतृत्व परिवर्तन चाहते हैं। कुछ राजनीतिक लोग इसे वसुन्धरा गुट का नतीजा बता रहे हैं। कुल मिलाकर भाजपा विधायकों की ओर से अपनी ही सरकार को घेरा जाना राजनीतिक गलियारों में उचित नहीं माना जा रहा है। अब देखना यह है कि पार्टी के शीर्षस्थ नेता इस चिंगारी को यहीं बुझा देंगे या यह दावानल का रूप धारण कर लेगी।
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Sunday, April 6