Friday, April 4

पश्चिम-मध्य रेलवे में पहली बार कोटा मंडल में रेल गाड़ियों की सुरक्षा की दृष्टि से अपनाई जाने वाली कवच कार्यप्रणाली का सफल परीक्षण किया गया। यह रेल सेवा में आधुनिक नई तकनीक है।

अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कोटा मंडल के बयाना-भरतपुर खण्ड में मंडल रेल प्रबंधक मनीष तिवारी ने शुक्रवार को विभिन्न आयामों में कवच की कार्यप्रणाली की विधिवत जांच के लिए परीक्षण किया गया जो कि पूर्णतः सफल रहा। कवच विकसित भारत की रेल सेवा में आधुनिक नई तकनीक है।

कवच की कार्यप्रणाली के इस परीक्षण में पिंगोरा स्टेशन के होम सिग्नल को खतरे की स्थिति यानी लाल सिग्नल कर सिग्नल पासिंग एट डेंजर को रोकने का सफल परीक्षण, खण्ड में ओवरस्पीड पर नियंत्रण के लिए कवच की कार्यशीलता परीक्षण, लूप लाइन पर गति नियंत्रण, समपार फाटक पर आटोमेटिक लोको द्वारा सीटी बजने की सुनिश्चिति, स्थाई गति प्रतिबन्धो की अनुपालना जाँच एवं लोको के भीतर डिस्पले पर सटीक सिग्नलों का दर्शाने का परीक्षण किया गया।

सूत्रों ने बताया कि कवच रेल संचालन प्रणाली में विश्वसनीय सुरक्षात्मक परत प्रदान करती है। इसे लागू होने के बाद ट्रेन चालको के द्वारा मानवीय भूल से सिगनल को अनदेखा कर होने वाली सुरक्षा चूक की दुर्घटनाओं से हमेशा के लिए निजात मिल जायेगी। इस तकनीकी से लोको पायलट को इंजन के अंदर ही 4 से 5 किमी तक के सिगनल की स्थिति दिख जाती है। इस परीक्षण के दौरान मंडल रेल प्रबंधक मनीष तिवारी सहित जीएसयू यूनिट के सचिन शुक्ला, वरिष्ठ मंडल दूर संचार एवं संकेत इंजीनियर श्री आर आर मीणा और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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