बीकानेर, राजस्थान पल्स न्यूज।
“गुण मंदिर सुंदर युगल, मंगल मोघ निधाम, ब्राह्मण तीज चरण रति दिजो वरदान…शृष्ठि के पालनकर्ता भगवान वामन का अवतार धारण कर राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांग ली। एक पग में धरती, दूसरे में स्वर्ग नाप लिया। अब राजा से बलि से कहा तीसरा पग कहां रखूं…तब राजा बलि ने कहा मेरे सिर पर। बलि की दानवीरता देख भगवान भी प्रसन्न हुए। राजा बलि-वामन भगवान के संवादों का ताना-बाना बुनता यह दृश्य आज सुबह बिन्नाणी चौक स्थित रघुनाथ मंदिर के आगे साकार हो रहा था।

अवसर था शरद पूर्णिमा की मध्य रात्रि को शुरू हुई महारास के मंचन का। इसमें कृष्ण की बंशी लीला, माखन चोरी, देवो के देव महादेव लीला और अंत में राजा बलि और वामन अवतार कथा को मंच पर साकार किया गया। कलाकारों ने खास अंदाज में अपने अपने पात्रों के संवादों को मंच पर साकार कर दिया। गीत-संगीत से सजी महारास को देखने के लिए बड़ी तादाद में श्रद्धालु रघुनाथ मंदिर के आगे आज सुबह तक जुटे रहे।
चार चरणों में मंचित महारास में ठाकुरजी ने कई लीलाएं दिखाई। इसमें कृष्ण, बलराम, नंदी, महादेव, दीवान, छड़ीदार, राजा बली, शुक्राचार्य सहित पात्रों को कलाकारों ने मंच पर साकार कर दिया। सैकड़ों वर्षों से रघुनाथ मंदिर परिसर के आगे महारास का मंचन किया जा रहा है। महारास का पूर्वाभ्यास गणेश चतुर्थी को शुरू हो गया था। इसमें पात्र बनने वाले कलाकारों के साथ ही गीत-संगीत के संगतकार संवादों, भजनों का पूर्वाभ्यास किया था।
लगाया खीर का भोग
महारास के दौरान रघुनाथजी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। ठाकुरजी के खीर का भोग लगाया गया। आरती के बाद महारास शुरू हुई। श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया।
इन्होंने निभाई भागीदारी
महारास में कृष्ण की भूमिका लेखक व्यास, बलदाऊ-कार्तिक स्वामी , मनसुखा-यश सारस्वत, गणेश रंगा, आनंद रंगा, महादेव-नारायण रंगा, नंदी-यश रंगा, सखी-देव रंगा, आशानंद हर्ष, राजा बलि-आशुतोष आचार्य, गुरु शुक्रचार्य-विष्णु दत्त व्यास, दीवान-विजय आचार्य, छडीदार-मयंक व्यास सहित कलाकारों ने भूमिका निभाई।